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आर्य विदेशी थे या भारतीय जाने पूरा सच
आर्य विदेशी थे या भारतीय जाने पूरा सच

आर्य विदेशी थे या भारतीय जाने पूरा सच

आज हमें जो भी एतिहास पढ़ाया जा रहा सब अंग्रेजों की बनाई गई शिक्षा व्यवस्था से लिया गया है और आर्य भारत में भर से आये थे ये भी अंग्रेजो ने ही कहा था लेकिन  शर्म की बात है की आज़ादी के इतने वर्षों के बाद भी अंग्रेजों की बनाई गई शिक्षा व्यवस्था के अनुसार ही  हमें  पढ़ाया जा रहा है | अंग्रेज मैकोले ने कहा था की अगर हम भारतीयो के गर्व से भरे इतिहास को विकृत करके पढ़ायें तो हम भारत को बहुत लम्बे समय तक गुलाम रख सकेंगे | और हुआ भी ऐसे , आज हम आजाद जरूर है लेकिन मानसिक रूप से अभी भी हम अंग्रेजों के गुलाम हैं |

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लेकिन सबसे बढ़ी विकृति अंग्रेजों के ने ये डाली की आर्य भारत से नहीं है ये तो बाहर से आयें है | लेकिन अगर हम भारत के ग्रन्थों का अध्यन्न करें तो पता चलेगा कि आर्य कोई विशेष जाती या धर्म नहीं है ये एक शब्द है जिसका अर्थ है “ श्रेष्ठ व्यक्ति “ यानि आर्य श्रेष्ठ व्यक्ति को कहा जाता है |  और दुसरे शब्दों में कहें तो जिस व्यक्ति  का आचरण बहुत अच्छा है और दूसरों को मिसाल देने के लायक है इस प्रकार के व्यक्ति को आर्य कहा जाता है |

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हम भारत के पुराणों की बात करें तो श्री कृष्ण को आर्य पुत्र कहा जाता था और श्री कृष्ण ने कई बार अर्जुन को आर्य पुत्र कहकर बुलाया है | तो इन सभी बातो से ये समजा जा सकता है की आर्य कोई धर्म या जाति नहीं है ये सिर्फ एक शब्द है | लेकिन आज हमें ये पढ़ाया जा रहा है की आर्य तो बाहर से आये थे | और अंग्रेजो ने हमें ये कह कर भ्रमित किया की आर्य तो मध्य एशिया से आये थे लेकिन जब दुनिया के वैज्ञानिकों ने इस बात पर शोध किया तो पता चला की मध्य एशिया में जो भी जातिया रहती है उन सभी के DNA से भारतीयों के DNA  मिलाये और इन दोनों के DNA   आपस में नहीं मिले तो सोचने वाली बात यह है की आर्य भारत के बाहर से कैसे आये ?

लेकिन इसके उलटी बात यह है की भारत के लोग दुनिया के बाकि स्थानों पर गये और उन्होंने हिन्दू धर्म का प्रचार किया यानि अगर कहा जाये की एक वक्त था की दुनिया में सिर्फ हिन्दू या कहें सनातन धर्म ही प्रचलित था | और आज भी इंडोनेशिया और एशिया के कई देशों में देवी देवताओं की मुर्तिया मिलती है जो इस बात का सबूत है कि सनातन धर्म पुरे विश्व में  फैला था |