Friday , July 28 2017
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बाबा हट परा जी महाराज : महान संत

भारतवर्ष सदा से ही अध्यातम की धरती रहा है ! इस भारत में भी पंजाब के संतो का तो क्या कहना इस धरती को वीर भूमि कहा जाता है क्योंकि इस धरती के लोग ज़ुल्म के खिलाफ आवाज़ उठाना जानते है ! फिर चाहे वो हिन्दोस्तान का पंजाब हो या पाकिस्तान का पंजाब ! इस धरती के लोग जितने वीर है उतने ही ईश्वर भक्त भी है ! आज भी पाकिस्तान के पंजाब से हम हिन्दोस्तान के पंजाबी जुड़े हुए है !
पाकिस्तान से हमारे मुस्लिम भाई मलेरकोटला और सिरहिन्द में रोजा शरीफ पर माथा टेकने आते है और हिंदुस्तान से लोग गुरुद्वारा पंजा साहिब, गुरुद्वारा ननकाना साहिब, पीर फरीद की मजार, बाबा बुल्लेह शाह की मजार, सयालकोट में गोरख धूना, बाबा नारायण दास का डेरा और भी ऐसे अनेको तीर्थ है जिनका दर्शन करने हर साल हजारो पंजाबी भाई पाकिस्तान जाते है ! हमारे खेल मेलो में पाकिस्तान के पंजाबी खिलाडी पंजाब स्टाइल कब्बड्डी खेलने आते है और हमारे पंजाब से खिलाडी पाकिस्तान कब्बड्डी खेलने जाते है ! हमारे गाँव से बहुत से लोग पाकिस्तान
गए पर किसी भी हिन्दुस्तानी के साथ वहां के लोगो ने बुरा सलूक नहीं किया ! केवल कुछ इलाके ऐसे है जिस जगह आंतकवाद का जोर है पर हमारा गन्दा मीडिया गलत प्रचार करता है !

किसी समय इस पंजाब में पांच नदिया बहती थी इसी से इसका नाम पंजाब पड़ गया ! पंज का मतलब पांच और आब का मतलब पानी मतलब जिस जगह पांच प्रकार का पानी हो ! एक बार मै केदारनाथ गया वहां बाबा चंद्रगिरी जी से भेंट हुई ! बाबा चंद्रगिरी जी ने कहा किस जगह से आये हो मैंने कहा पंजाब से उन्होंने हमारा बहुत सम्मान किया और कहा आज  हमारे पास रुको मैंने कहा बाबाजी आपको हमारे रुकने से कष्ट होगा ! बाबाजी ने कहा तुम पंजाब से हो जितना धन तुम लोग लंगर चलाने में खर्च करते हो उतना धन पूरे भारत के किसी इलाके में धर्म के नाम  पर खर्च नहीं होता ! जो धन तुम ईश्वर के नाम पर खर्च करते हो ईश्वर उस से दस गुना अधिक धन तुम्हे वापिस कर देता है ! इसी कारण पंजाब बहुत संम्पन है ! पंजाब की तारीफ सुनकर मेरी छाती २ इंच बढ़ गयी ! यह बात है भी सही पंजाब में कोई भूखा नहीं मर सकता !

ईश्वर की ऐसी कृपा है पंजाब पर अमरनाथ की यात्रा हो या मणिमहेश की यात्रा चाहे हरियाणा का गोपालमोचन मेला सबसे ज्यादा लंगर पंजाब के होते है !  किसी ज़माने में पंजाब अफगानिस्थान तक फैला हुआ था और इस पर महाराजा रणजीत सिंह का राज था ! उनके सेनापति का नाम था हरी सिंह नलुया ! अफगानिस्थान में उनका इतना खौफ्फ़ था जब कोई बच्चा सोता नहीं था तो उसकी माँ कहती थी बेटा सो जा नहीं तो नलुआ आ जायेगा ! उस काल में संतो का बहुत सम्मान होता था ! बाबा नानक, बाबा बुल्लेह शाह, बाबा फरीद, बाबा देवीगर, बाबा मस्त राम, बाबा वीरम दास, बाबा दरगाही शाह फकीर, बाबा श्री चन्द्र जी ऐसे अनेको संत पंजाब की इस धरती ने पैदा किये है ! मेरा मानना है कि वीरभूमि से भी ज्यादा यह भूमि संतभूमि है !

जिस समय महाराजा रणजीत सिंह का राज पंजाब में था उस समय की बात है एक नाथ पंथी संत थे ! वे बहुत पहुचे हुए थे और करामाती थे ! उनका नाम किसी को भी ज्ञात नहीं था ! वे पंजाब के शहर सुनाम में रहते थे ! वे सदैव धूने के पास ही बैठे रहते थे कब सोते थे कब जागते थे किसी को पता भी नहीं चलता था ! एक बार उनके दर्शनों के लिए एक जट्ट सिक्ख युवक आया ! वे उनकी करामाते देखकर हैरान हो गया और उनसे दीक्षा देने की याचना की पर वे संत मानने के लिए तयार न हुए और कहा मै किसी को शिष्य नहीं बनाता ! वे युवक बड़ा हट्ठी था ! उसने पक्का निश्चय कर लिया के गुरुमंत्र तो इनके मुख से ही लूँगा ! वे उन्हें दिल से गुरु मानता था और हररोज जाकर उनसे कहता गुरूजी गुरुमंत्र दीजिये पर उस संत पर उनकी बातो का कोई असर नहीं पड़ा ! एक दिन उस युवक ने निश्चय कर लिया की आज जब गुरुमंत्र की याचना करूँगा तो गुरूजी जो कह देगे उसे ही अपना गुरुमंत्र मान लूँगा ! ऐसा निश्चय कर वे संतजी के पास पंहुचा और कहा गुरूजी गुरुमंत्र दीजिये ! संत ने गुस्से में उसे लात मारकर कह दिया हट परा ! हट परा एक पंजाबी शब्द है जिसका मतलब है दूर हट !

नाथ पंथ में १२ वर्ष तक गुरुमंत्र जपने की प्रथा है ! उस युवक ने इसे ही गुरुमंत्र मान लिया और धूना लगाकर हट परा हट परा जपने लगा ! संतजी ने वे स्थान उसी समय छोड़ दिया ! उस युवक का नाम लोगो ने हट परा रख दिया ! जो भी उनके दर्शन करता उनकी मनोकामना पूर्ण हो जाती ! धीरे धीरे बाबा हट परा के चर्चे सारे राज्य में फ़ैल गए ! एक दिन उस नगर के राजा का बेटा मर गया ! उसकी मृत्यु से दुखी होकर रानी रोने लगी ! तभी दासी ने कहा बाबा हट परा के पास चले जाओ ! वे इस मृत बालक को जीवित कर सकते है ! राजा रानी दोनों अपने उस बालक को लेकर बाबा हट परा के पास गए और उनके चरणों में रख दिया और रोने लगे ! बाबाजी ने उस बालक को लात मारी और कहा हट परा बस फिर क्या था? उस मृत बालक में प्राण  आ गए और वे बालक भी हट परा हट परा बोलने लगा ! इस चमत्कार से बाबा जी पूरे इलाके में प्रसिद्द हो गए ! राजा का बेटा बाद में बाबा  हट परा जी का शिष्य बना ! हट परा हट परा जपने से बाबाजी को ब्रहम ज्ञान हो गया था ! बाबा हट परा जी ने कहा जो भी मेरे गुरूजी की निन्दा करेगा वो सीधा नरक को जायेगा ! आज बाबा हट परा जी के नाम पर संप्रदाय चल रहा है !

जब मै उस संप्रदाय के संतो से मिला तो उन्होंने कहा हट परा हट परा जपते जाओ इसी जन्म में मुक्ति मिल जाएगी ! मैंने उनका कहना मानकर हट परा हट परा कुछ दिन जपा तो मुझे ध्यान में अनेक अनुभूतिया हुई ! उन्होंने अनुभूतिया बताने से मना किया है ! मेरा मानना है कि अ आ इ ई यह सारी वर्णमाला ईश्वर का नाम है आप जिस नाम से उसे पुकारोगे ईश्वर उसी रूप में हाज़िर हो जायेगा ! दीक्षा के लिए किसी लम्बे चौड़े विधान कि जरूरत नहीं होती ! गुरु ने कह दिया इस मन्त्र को जपो तो बस जपो ! भक्त कबीर जी की दीक्षा नहीं हुई थी रामानंद जी से पर वे बहुत बड़े संत हुए ! शक्तिपात हो चाहे न हो आपके मन में मन्त्र के प्रति पूर्ण विश्वास होना चाहिए ! एक बार नारद जी गोकुल गए और वहां उन्होंने एक गोपी को देखा ! वे गोपी आँखे बंद करके बैठी थी नारद जी ने कहा क्या कर रही हो? क्या कृष्ण का ध्यान कर रही हो? उस गोपी ने कहा इस माखन चोर को ध्यान से निकालने की कोशिश कर रही हूँ ! जिस जगह देखो यह माखन चोर नज़र आता है सास में भी और ससुर में भी मै तो तंग आ गयी हूँ इस माखन चोर से यह सुनकर नारदजी ने कहा धन्य है यहाँ की गोपीया ! वे गोपीया कृष्ण जी को माखन चोर कहती थी ! अब आप ही बताये किस ग्रन्थ में कृष्ण जी का नाम माखन चोर लिखा है !

इस दुनिया में अनेको संत हुए सबने अपने अपने तरीके से ईश्वर तो एक नया नाम दिया ! पैगम्बर मुहम्मद आये उन्होंने ईश्वर को अल्लाह कहकर पुकारा ! ईश्वर उनके बुलाने से आ गए ! बाबा नानक जी आये उन्होंने ईश्वर को वाहेगुरु कहकर बुलाया ईश्वर वाहेगुरु के रूप में आ गए ! बाबा हट परा जी आये उन्होंने ईश्वर को हट परा कहकर पुकारा ईश्वर ने हट परा का रूप बना लिया पर किसी से ईश्वर ने यह नहीं कहा मेरा नाम मत बिगाड़ो ! जिसने श्रद्धा से बुलाया ईश्वर उसे मिलने चले आये ! मेरा मानना है यदि आप ईश्वर का नाम जिंगालाला रख दोगे तो ईश्वर जिंगालाला कहने पर भी भागे चले आयेगे क्योंकि ईश्वर प्रशंसा के नहीं प्रेम के भूखे है ! गुरु और मन्त्र पर पूर्ण विश्वास रखे आपको सिद्धि मिलने से कोई नहीं रोक सकता ! फल तो आपके विश्वास से मिलेगा न दीक्षा से मिलेगा न शक्तिपात से मिलेगा ! जय बाबा हट परा !

 

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