Tuesday , October 23 2018
Home / हिन्दू योद्धा / इनके ऊंठ के पीछे लटकता था अंग्रेजो का झंडा : भूरसिंह शेखावत
Bhursingh Shekhawat

इनके ऊंठ के पीछे लटकता था अंग्रेजो का झंडा : भूरसिंह शेखावत

केसे लूटा था अंग्रेजों का झंडा ?

आउटर आर्म्स राइफल को बाद में राजपुताना राइफल्स नाम दे दिया गया जिसका मुख्यालय दिल्ली में है| राजपुताना राइफल्स के जवान आज भी स्वीकार करते है कि बलजी भूरजी ने उनकी रेजीमेंट का झन्डा लूट लिया था| इस रेजीमेंट के एक पूर्व जवान ने नाम नहीं बताने की शर्त पर बताया कि- बलजी भूरजी ने झन्डा लूटने का चैलेन्ज दे रखा था| कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच वे अधिकारीयों की ड्रेस में आये और आराम से झन्डा उतार कर गाड़ी में ले गए| सुरक्षा कर्मी उन्हें सैल्यूट देते रहे| पूर्व जवान के अनुसार आज भी जब हम कई रेजिमेंट्स के जवान एक साथ होते है तो दूसरी रेजीमेंट के जवान हमारे ऊपर व्यंग्य कसते है कि पहले अपनी रेजीमेंट का झन्डा तो बरामद कर लाओ|

स्थानीय जनता के साथ सेना में भी इस जनश्रुति के चलन के बाद यह साफ़ है कि बलजी भूरजी ने अंग्रेजों की नसीराबाद स्थित आउटर आर्म्स राइफल को नीचा दिखाने के लिए उनका झन्डा लूटा और उसे अपने ऊंट की पूंछ पर लटकाकर घूमते थे| इनकी क्रांतिवीरों की गतिविधियों से तंग आकर अंग्रेजों ने जोधपुर पुलिस को किसी भी अन्य राज्य में घुस कर उनका सफाया करने का आदेश दिया जिसके तहत जोधपुर पुलिस के जाबांज अधिकारी बख्तावर सिंह महेचा ने 300 सिपाहियों के साथ बलजी भूरजी व गणेश दरोगा को घेर लिया|

बख्तावर सिंह के घेरे के बाद इन तीन वीरों ने 300 सिपाहियों का बहादुरी से सामना किया और वीरतापूर्वक लड़ते हुए 30 अक्तूबर 1926 शहीद हो गए|