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पाकिस्तान के इस मंदिर में नवरात्रों में मुस्लिम भी जलाते है माता रानी कि ज्योत : हिंगलाज माता
पाकिस्तान के इस मंदिर में नवरात्रों में मुस्लिम भी जलाते है माता रानी कि ज्योत : हिंगलाज माता

पाकिस्तान के इस मंदिर में नवरात्रों में मुस्लिम भी जलाते है माता रानी कि ज्योत : हिंगलाज माता

हिंगलाज माता  : जब भगवान शिव सती माता के मृत शरीर को लेकर तांडव करने लगे तो तीनो लोकों में विनाश होने लगा , इस विनाश को रोकने के लिए भगवान् विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के शरीर को 51 भागों में बांट दिया | माता सती के शरीर के विभिन्न अंग विभिन्न स्थानों में गिरे और इन स्थानों को माता के शक्ति पीठों के रूप में जाना जाने लगा |

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जहाँ माता सती का सिर गिरा वह स्थान हिंगलाज माता के मन्दिर के नाम से जाना जाने लगा | बलूचिस्तान की दुर्गम पहाड़ियों में स्थित माता हिंगलाज मन्दिर 51 पीठों में बहुत ही महत्वपूर्ण शक्तिपीठ है | ये मन्दिर बलूचिस्तान के हिंगोल नदी के समीप हिंगलाज क्षेत्र में है | इस मन्दिर में माता सती कोटरी रूप में और भगवान् शिव भीम्लोचन भैरव के रूप में बिराजमान हैं |

इस मन्दिर की इतनी मान्यता है की यहाँ गुरु गोरखनाथ , गुरु नानक देव जैसे कई महान संतों ने पूजा किया है और तो और श्री राम चन्द्र जी भी इस मन्दिर में पूजा करने आये थे | भगवान् परशुराम के पिता महर्षि जमद्ग्री ने भी यहाँ तप किया था | इस शक्तिपीठ की मान्यता इतनी है की साल भर यहाँ मेले जैसा माहोल बना रहता है | यहाँ पर बने गुरु गोरखनाथ के चश्में में माता रोज सनान करने आती है |

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एक अन्य मान्यता है की हिंगलाज माता चरणों की कुलदेवी हैं | हिंगलाज माता ने 8 वीं शताब्दी में सिंध प्रान्त में ममड के घर में आवड देवी के रूप में अवतार लिया था | आवड , गुलो , हुली , रेप्य्ली , आछो , चचिक और लध्वी नाम की सात बहने थी | इनकी सुन्दरता पर सिंध का राजा हमीर सुमर मोहित हो गया था और उसने उनसे विवाह का प्रस्ताव भेज दिया था लेकिन पिता के मना करने पर उसने उनको कैद कर लिया था | इस कारण 6 देवियाँ सिंध से तेमडा पर्वत पर आ गई |

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लेकिन एक देवी ततनीयादरा नाम के नाले के उपर घर बनाकर रहने लगी | जब आवड देवी ने तेम्दा पर्वत को अपना निवास स्थान बनाया तो उनके दर्शन के लिए अनेक चारण आने लगे | इस देवी ने तेमडा नाम के राक्षस को मारा था और इस कारण इन्हें तेमदेजी भी कहतें है | आवड जी का मुख्य स्थान जैसलमेर से लगभग 20 मील दूर एक पहाड़ी में बना है | माता हिंगलाज देवी की यात्रा एक कठिन यात्रा है और यहाँ का रास्ता सुनसान और दुर्गम है |