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हिन्दू पौराणिक कथाओं के 8 बड़े खलनायक
हिन्दू पौराणिक कथाओं के 8 बड़े खलनायक

हिन्दू पौराणिक कथाओं के 8 बड़े खलनायक

हिन्दू पौराणिक कथाओं के 8 बड़े खलनायक

भारतीय पौराणिक कथाओं में खलनायकों की तूती बोलती रही है। इन कथाओं में कई ऐसे खलनायकों का जिक्र है, जिन्होंने अपने स्वार्थ के लिए अनुचित बल प्रयोग कर मानवता को आहत किया था। हालांकि लौकिक सत्य तो यह है कि अन्त में बुराई पर अच्छाई की जीत होती है। इसे हम अपने पौराणिक कथाओं में साक्षात देखते हैं। आज हम यहां हिन्दू पौराणिक कथाओं में वर्णित उन 8 खलनायकों का ज़िक्र कर रहे हैं, जिनके बुरे कर्म ही उनके विनाश का कारण बने।

1. केकई:

केकई अयोध्या के राजा दशरथ की प्रिय पत्नी थीं। माना जाता है कि राजा दशरथ अपनी तीन पत्नियों में से केकई को अधिक पसन्द करते थे, लेकिन केकई ने अपनी मान और प्रतिष्ठा का अनुचित फायदा उठाया। वह भगवान राम के 14 वर्ष के वनवास के लिए ज़िम्मेदार बनीं। राजगद्दी को अपने बेटे भरत के लिए सुरक्षित करने के लिए केकई ने राजा दशरथ के समक्ष राम को 14 वर्ष के वनवास की जिद रखी। वह मंथरा थीं, जिसने केकई के ज़ेहन में राम के विरुद्ध विष घोला, लेकिन इस तर्क से केकई का अपराध कम नहीं होता, जिनकी वजह से राजा दशरथ की मृत्यु हुई थी।

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