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Battle of Saraighat
Battle of Saraighat

वो युद्ध जहाँ 10000 अफगान काटे गये- Battle of Saraighat

Battle of Saraighat

बख्तियार खिलजी अपने आक्रमणों से इतने होंसले में था की अब वो तिब्बत पर भी अपना अधिकार जमाना चाहता था और कट्टर इस्लामी धर्म को फैलाना चाहता था | तिब्बत से पहले उसे असम से होकर जाना था और अहोम साम्राज्य एक बड़ी चुनोती थी | वो १२०६ लगभग 10000 लोगों की सेना के साथ ब्रह्मपुत्र तट पर बने पुल को पार करके आगे बड़ता गया | वहां कामरूप  के राजा राम सिंह   को जब इस हमले का पता चला तो उन्होंने अपने दूत के हाथों  खिलजी को आक्रमण न करने के लिए संदेश भेजा लेकिन उसने एक न मानी और आगे बड़ता गया | सारा इलाका पहाड़ी था जिसके कारण उनको  प्रतिरोध का सामना करना पड़ा |

Battle of Saraighat

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इसके बाद उसने  पहाड़ी किले पर हमला कर दिया लेकिन ये उसकी जिन्दगी की सबसे बड़ी गलती थी | पहाड़ी सेना ने तीरों और बाणों से मुस्लिम सेना की बुरी हालत कर दी | हाल ऐसा हुआ की खिलजी को वापिस मुड़ना पड़ा | लेकिन सेना उसे इतनी आसानी से कैसे जाने देने वाली थी | वापिस आते समय न उसके पास खाना था और न ही पीना | फिर सैनिकों ने अपने घोड़े काटकर खाने शुरू कर दिए और जैसे तैसे अपना गुज़ारा किया | मुस्लिम सेना जिस पुल को पार करके आई थी वो पुल भी नष्ट कर  दिया गया था | ये देख के खिलजी और डर गया और उनको पास ही के मन्दिर में आश्रय लेंना पडा |

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Battle of Saraighat

लेकिन उस दिन खिलजी का अंत करीब था और इसी बीच असम की हिन्दू  सेना ने उसे घेर लिया और आक्रमण कर दिया | असम सेना ने खिलजी की सेना की इतनी बुरी हालत की कि सिर्फ 100 सैनिको के साथ ही वो लाख्नोती पहुंच सका | असम के हिन्दू सैनिको ने वो कर दिखाया था जो आजतक भारत के अन्य राज्य नहीं कर पाए थे | यही कारण था की आगे चलकर किसी भी हमलावर की असम पर आक्रमण करने की हिम्मत नहीं हुई और पुरे भारत पर मुग़ल सत्ता होने के बावजूद असम आज़ाद रहा | जहाँ पुरे भारत में हिन्दू मन्दिरों को मुस्लिम हमलावरों द्वारा तोडा जा रह था वहीं पूर्व के राज्यों में भव्य मन्दिर बन रहे थे और हिन्दू सुरक्षित था |

लेकिन शर्म की बात ये रही की आज पूर्वी इलाका भारत से कटा हुआ रहा और किसी ने भी इनको एहमियत नहीं दी |

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