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हिन्दू योद्धा जिसने बाबर को दो बार हराया : ठाकुर मोहन सिंह मडाड
हिन्दू योद्धा जिसने बाबर को दो बार हराया : ठाकुर मोहन सिंह मडाड

हिन्दू योद्धा जिसने बाबर को दो बार हराया : ठाकुर मोहन सिंह मडाड

ठाकुर मोहन सिंह मदाद एक महान योधा थे | उनका नाम इतिहास में एक वीर योधा और बाबर की सेना को धुल चटाने के लिए भी जाना जाता है | 1530 में जब बाबर लाहौर जाने के लिए रवाना हुआ तो वह सरहिंद पहुंचा | वहां पहुंचने पर उसकी भेंट समाना के काजी से हुई और उन काजी ने उसे बताया की कैथल के मोहन सिंह मदाद ने उनकी जागीर पर हमला किया और उसके पुत्र को मार डाला | यह सु  कर बाबर ने अपनी 3000 घुड़सवार सेना के साथ अली कुली हमदानी को उनपर हमला करने के लिए भेजा | जब राजपूतों ने मुगलों की सेना को अपने गाँव आते सुना तो राजपूतों की सेना ने मुगलों पर तीरों से हमला कर दिया | मुगल सेना हमला न सहन करते हुए पास ही के जंगल में चली गई | इस लड़ाई में 1000 मुगलों को मौत के घाट उतार दिया गया था | कुछ समय बाद जंगलों से निकलकर फिर से मुगलों ने राजपूतों पर हमला किया लेकिन फिर से मुगलों को मुह की खानी पड़ी | हर जाने पर अली कुली ह्मदानी सरहिंद पहुंचा और बाबर को अपनी हार के बारे में बताया | इसके बाद फिर से बाबर ने 6000 घुड़सवार सेना को राजपूतों पर हमला करने के लिए भेजा |

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जब तरसेम बेग सरहिंद से चला तो उसने सोचा की ठाकूर मोहन सिंह को सिर्फ बल से ही हराया जा सकता उसे छल से हराना होगा | मुगल सेना को 3 भागों में बाँट दिया गया और फिर राजपूतों पर हमला किया गया इस लड़ाई में ठाकुर मोहन सिंह मदाद दुश्मनों से घिर गये और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और पुरे गाँव को जला दिया गया | इस युद्ध में 1000 वीर राजपूतों ने अपना बलिदान दिया | ठाकुर मोहन सिंह जी को गिरफ्तार करके दिल्ली में बाबर के दरबार में पेश किया गया | बाबर ने उनको कहा की अगर वे इस्लाम कबूल करलें तो उन्हें मौत को सज़ा से माफ़ कर दिया जायगा | लेकिन उन्होंने ने इस्लाम को अपनाने की बजाये मौत को गले लगाना अच्छा समजा | बाबर में उनको मौत की सज़ा बड़े ही विशेष ढंग से दी | ठाकुर मोहन सिंह जी को जमीन में कमर तक गाड़ दिया गया और उनपर तीरों से वार किया गया | सैंकड़ो तीर उनके शरीर को छल्ली करते गये लेकिन उनका सिर बाबर के सामने न झुका | इस तरह रक्त की आखिरी  बूंद तक उनका सिर न झुका |

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