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पंजाब का सनातनी इतिहास , भाग-2
पंजाब का सनातनी इतिहास , भाग-2

पंजाब का सनातनी इतिहास , भाग-2

गायत्री मंत्र : विश्वामित्र मुनि ने पंजाब में ही गायत्री मंत्र की रचना की थी | यही नहीं इसी पावन धरती पर ही महर्षि पाणिनि ने संस्कृत की व्याकरण की रचना की थी और तो और चाणक्य और चरक ऋषि भी इसी धरती की ही सन्तान थे |

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महर्षि वाल्मीकि : अमृतसर का सम्बंध महर्षि वाल्मीकि जी और भगवान श्री राम से है | जब श्री राम चन्द्र जी अश्वमेध यग्य कर रहे थे तो उनका घोडा लव और कुश ने रोक लिया था जिसके कारण भीषण युद्ध हुआ था और भरत ,शत्रुघ्न और लक्ष्मण मुर्चित हो गये थे | तभी लव-कुश ने इंद्र से अमृत प्राप्त कर सभी को जगाया था और बाकि का अमृत जमीन में दबा दिया था | इसी जगह पर ही गुरु रामदास जी ने सरोवर खुदवाया था | अमृतसर में ही लव-कुश का जन्म हुआ था और वाल्मीकि जी ने उनके गुरु थे और दोनों राम पुत्रों का जन्म स्थान श्री राम तीर्थ नाम से जाना जाने लगा था | इसी सरोवर के चारों और मन्दिर बनाया गया जिसे आज स्वर्ण मन्दिर के नाम से जाना जाता है |

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भक्त सैन जी का जन्म स्थान : अपनी भक्ति के बल पर भगवान को भी नाई का कम करवाने वाले भक्त सैन का जन्म भी अमृतसर में सोहल ठठी गाँव में हुआ था | आज उनके श्लोक गुरु ग्रन्थ साहिब में अंकित हैं |