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पारे से सोना केसे बनाया जाता है ?

पारे से सोना केसे बनाया जाता है ?

पारे से सोना कैसे बनाया जाये रसायन विद्या या कीमियागिरी के बारे सदियों से प्रयत्न होते आ रहे है  , और आज भी कुछ लोग पारे से सोना बनाने में प्रयास कर रहे हैं ।

प्राचीनकाल में रसायनज्ञ पारद या पारे से सोना बनाने की विधि जानते थे.यह बात आज कोरी कल्पना लगती है जबकी इसके कई प्रमाण मौज़ूद हैं । 27 मई1942 को बिरला हाउस दिल्ली में पंजाब के रस वैद पंडित श्री कृष्णपाल शर्मा ने एक तोला पारे को सोने में बदल कर प्रत्यक्ष करके दिखाया था , उस समय वहाँ श्री अमृतलाल वि ठक्कर , श्री गोस्वामी गणेशदत्त जी लाहौर , बिरला मिल दिल्ली के सेक्रेटरी श्री सीताराम जी खेमका , चीफ इंजीनियर श्री विल्सन , और श्री वियोगी हरी उपस्तिथ थे । इस घटना को प्रमाणित करता हुआ शिलालेख आज भी बिरला मंदिर की यज्ञ शाला में लगा हुआ है जिसे मैं स्वयं देख कर आया हु और उस शिला लेख की फोटो भी यहां दे रहा हु । बिरला मंदिर की कार पार्किंग से सीढिया चढ़ते ही श्री युगलकिशोर बिरला जी की मूर्ति से थोड़ा आगे ही बाई ओर यज्ञशाला बनी हुई है वहां ये शिलालेख लगा हुआ है आप लोग भी जा कर देख सकते हैं ।

सच्चाई यह है कि ये प्रकिया बेहद कठिन और अनुभव सिद्ध है ,तमाम कीमियाग़र सोना बनाने में नाकामयाब रहे, कुछ थोडे से जो सफल रहे उन्होने इस विद्या को गलत हाथों में पडने के डर से इसे बेहद गोपनीय रखा। कृष्णपाल शर्मा जी ने भी ये विद्या कोई सुपात्र व्यक्ति न मिलने के कारण किसी को नही बताई ।
मेरा ये पूर्ण विश्वास है के पारे से सोना बनाया जा सकता है और ये बात मैं आप को अपने निजी अनुभव के आधार पर ही कह रहा हु , मैं सोना बनाने में तो सफल नही हो सका लेकिन पारे को संस्कारित कर के तरल पारे पर शुद्ध स्वर्ण की चमक लाने में जरूर सफल हुआ हूँ इस पारे को अगर पानी और धुप में रखा जाये तो पारे की सतह पर शुद्ध स्वर्ण जैसी चमक आ जाती है , हालांके ये पारा देखने में सामान्य पारे जैसा ही लगता है , लेकिन बाजार में मिलने वाले पारे पर ऐसी स्वर्ण जैसी आभा नही आती । इस पारे को अगर चार तह किये हुए वस्त्र में छाना जाये , और इस पारे को गर्म करके उड़ा दिया जाये और ठंडा करके फिर से पारा बना दिया जाये तो भी पारे पर स्वर्ण जैसी आभा आती ही रहती है । ऐसे पारे का बन्धन कर के जब मैं शिवलिंग का आकर दे देता हु तो उस पारद शिवलिंग पर भी वैसी ही स्वर्ण की आभा आती है , जो इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है के पारे से सोना बनाया जा सकता है ।
मैं यहाँ अपनी प्रशंसा नही करना चाहता बल्कि इस विषय की गम्भीरता को सामने लाना चाहता हु , के रसविद्या का पुनरुद्धार होना चाहिए जिन लोगो ने इस क्षेत्र में कोई सफलता हासिल की है उनसे मैं विचार विमर्श करने को तैयार हु , लेकिन मेरी एक विनती है कृपया वो लोग ही मुझे फोन करें जिन्होंने रसशास्त्र में कोई विशेष उपलब्धि हासिल की हो और उसे प्रमाणित भी कर सकते हों , जैसे मेरे द्वारा संस्कारित पारे पर स्वर्ण आभा आती है तरल और ठोस दोनों अवस्थाओं में , जो की सारी दुनिया के सामने है।

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हमे मिलकर प्रयास करना चाहिए , जिस से हमारे देश का खोया हुआ गौरव फिर से हासिल हो सके ।

धन्यवाद ।