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मै पीड़ित हिन्दू संत मोदी जी मुझे न्याय चाहिए : रामकृष्ण पुरोहित
मै पीड़ित हिन्दू संत मोदी जी मुझे न्याय चाहिए : रामकृष्ण पुरोहित

मै पीड़ित हिन्दू संत मोदी जी मुझे न्याय चाहिए : रामकृष्ण पुरोहित

इतिहास का ऐसा यौद्धा, जिसे जीवन से ज़्यादा सनातन से सनातन से प्रेम हो ,,, एक ऐसा यौद्धा जिसने मुगलो के गुरुर को कुचलकर दिल्ली पर 364 साल बाद शाशन किया हो, एक ऐसी हस्ती, जिसका नाम सुनकर मुगलो के पसीने छूट जाया करते थे, जिसके सामने खड़े होने की हिम्मत इस्लामी अत्याचारियों ने कभी ना की ।। जिसने दिल्ली की तख़्त पर बैठते ही घोषणा की, अगर किसी ने गाय को काटा, तो उसका सर काट दिया जाए ।।

हेमचंद्र विक्रमादित्य कोई संपन्न परिवार से नहीं थे, जिस समय हिन्दू दो समय के अन्न के लिए संघर्ष कर रहे थे, उस समय हेमू व्यापर आदि कर , किसी भी तरह हिन्दू रक्षा के लिए धन तथा गुप्त सैनिक इकठ्ठा कर रहे थे ।।

हेमचंद्र को किसी ने राजा घोसित किया नहीं था, और सही भी है, सिंह का कोई राजतिलक थोड़ी ना करता है, अपने पुरुसार्थ और धरमः की भावना से ओत-प्रोत हेमचंद्र ने खुद को भारत का राजा घोसित कर दिया ।। जब वो दिल्ली आये, तो हिन्दू जनता ने फूलों की वर्षा से ऊन्का स्वागत किया ।।

पानीपत की दूसरी लड़ाई प्रारम्भ हुई, हेमचंद्र की सेना मुगलो पर टूट पड़ी,,, इससे पहले हेमचंद्र विक्रमादित्य ने लगातार 20 युद्ध जीत हजारो सालो बाद किसी राजा के विक्रमादित्य बनने का गौरव प्राप्त किया था, यह सममान उन्होंने ख़ुद को नहीं दिया, बल्कि उनकी वीरता का सममान जनता ने उन्हें दिया ।।

पर हाय रे दुर्भाग्य ——

अकबर और बेरम खां युद्ध के मैदान में पहुंचे ही नहीं ।। वो पानीपत से दूर शोधपुर गाँव में ही रुक गए । क्यू की हेमू से लड़ने की ना उनमे हिम्मत थी । हेमचंद्र जी की बायीं आँख में तीर लग गया , इसका कारण भी उनकी मुहबोली मुस्लिम बहन ही थी ।। हेमचंद्र के आँख में तीर लगने के बाद भी वो लड़ते रहे, किन्तु लड़ते लड़ते हांथी से गिर पड़े ।।

मूर्छित अवस्था में उन्हें पानीपत से मैदान से शोधपुर लाया गया, जहाँ कायर अकबर और बैरमखाँ पहले से ही छुपे बेठे थे ।।

बड़ी बेऱंहमी से हेमू के सर को रेंता गया, उनकी खाल में भूंसा भर के उनके धड़ और शरीर को लालकिले पर लटकाया गया, ताकि हिन्दू अपमानित होते रहे ।।

जहाँ हेमचंद विक्रमादित्य का सर काटा गया, वहीँ एक समाधी बनायीं गयी, जिससे की आने वाली पीढ़ी उस वीर राजा के इतिहास को जाने, और उससे प्रेरणा ले ।

उसी समाधी पर छल से मुसलमानो ने फिर कब्ज़ा कर लिया, और उस वीर का इतिहास आज पूरी तरह से ही खत्म कर दिया ।।

गलती से ही सही, रामकृष्ण पुरोहित हेमचंद्र विक्रमादित्य बाबा की समाधी पर पहुंच गया ।

रामकृष्ण पुरोहित ने क्या देखा उस समाधी स्थल पर ? पढ़ कर  हो जायेंगे हेरान .. NEXT PAGE