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व्रत क्यूँ रखते हैं ?

जानें व्रत क्यों रखना चाहिए ?

हिन्दु्ओं के 10 प्रमुख कर्तव्य है:-  1.संध्योपासन, 2.व्रत, 3.तीर्थ, 4.उत्सव, 5.सेवा, 6.दान, 7.यज्ञ, 8.संस्कार 9. वेद पाठ,  धर्म प्रचार। इन 10 में से जानिए व्रत या उपवास के बारे में संपूर्ण जानकारी।

कोई भी पूजा-पाठ या त्योहार होता है, तो लोग व्रत रखते हैं।

मनुष्य को पुण्य के आचरण से सुख और पाप के आचरण से दु:ख होता है। संसार का प्रत्येक प्राणी अपने अनुकूल सुख की प्राप्ति और अपने प्रतिकूल दु:ख की निवृत्ति चाहता है।

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मानव की इस परिस्थिति को अवगत कर त्रिकालज्ञ और परहित में रत ऋषिमुनियों ने वेद, पुराण, स्मृति और समस्त निबंधग्रंथों को आत्मसात् कर मानव के कल्याण के हेतु सुख की प्राप्ति तथा दु:ख की निवृत्ति के लिए अनेक उपाय कहे हैं।

उन्हीं उपायों में से उपवास श्रेष्ठ तथा सुगम उपाय हैं।

संकल्पपूर्वक किए गए कर्म या किसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए दिनभर के लिए अन्न या जल या अन्य तरह के भोजन या इन सबका त्याग व्रत कहलाता है। इसे धर्म का साधन माना गया है।

वैज्ञानिक तर्क-

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उपवास को हम यहां अनाहार के अर्थ में लेते हैं। उपवास एक प्रकार की शक्ति है जिसके बल से जहां रोगों को दूर कर सेहतमंद रहा जा सकता है, वहीं इसके माध्यम से सिद्धि और समृद्धि भी हासिल की जा सकती है।

आयुर्वेद के अनुसार व्रत करने से पाचन क्रिया अच्छी होती है और फलाहार लेने से शरीर का डीटॉक्सीफिकेशन होता है, यानी उसमें से खराब तत्व बाहर निकलते हैं।शोधकर्ताओं के अनुसार उपवास करने से कैंसर का खतरा कम होता है। हृदय संबंधी रोगों, मधुमेह, आदि रोग भी जल्दी नहीं लगते।

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