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Suryaputra-Karan
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करण के मरण के पीछे भगवन परशुराम के श्राप ।

जब द्रोणाचार्य के पास सुत पुत्र करण शस्त्र विद्या सिखने के लिए गया था , तभ द्रोणाचार्य जी ने साफ़ मना कर दिया था निराश हो कर भगवन परशुराम जी के पास शास्त्र विद्या सीखने के लिए चला गया था।

पर भगवान परशुराम जी ने प्रण लिया हुआ था कि इस विद्या का दुरूपयोग न हो इस लिए विद्या सिर्फ ब्राह्मण को ही सिखाई जायेगी । सूत पुत्र ने झूठ बोल कर उनसे विद्या लेनी आरम्भ कर दी।

फिर एक दिन जंगल में कहीं जाते परशुराम जी को थकान महसूस हुई वो विश्राम करना चाहते थे । करण ने उनका सिर अपनी गोद में रख लिया और भगवन परशुराम जी घेहरी निंद्रा में चले गए।

विश्राम करतेे एक कीड़ा ने करण के पैर को बहुत गहरा काट लिया जिस से उसका बहुत लहू पहने लगा । पूरा विश्राम करके जब परशुराम जी उठे उन्होंने पूछा यह क्या हुआ , अगर कीड़ा काट ही गया मुझे उठा देते।


करण ने बताया आप परेशान ना हो इस कारण बैठा रहा ।
भगवान परशुराम को बहुत आश्चर्य हुआ और शक भी उन्हीने उस से पूछा तुम कौन हो ? तुम जरूर कोई क्षत्रिये हो ब्राह्मण नहीं हो सकते, ब्राह्मण कभी भी इतनी पीड़ा नहीं सेहन कर सकता। फिर करण को मजबूरन वश सब बताना पड़ा।
इस से भगवन परशुराम जी को क्रोध आ गया और श्राप दिया तुम्हे जब सबसे ज्यादा जरुरत होगी शस्त्र विद्या की तुम तभी भूल जाओगे।हुआ भी यह ही , जब करण के सामने अर्जुन आया और एक दूसरे के ऊपर बाण चलने शुरू हुये अंतिम में करण को बाण चलाने भूल गए । अर्जुन के बनो ने कारन का सीना छली कर दिया।


आखिर में दान वीर करण श्राप ग्रहिसित हो कर मृत्य का भागी बना। अगर वो झूठ न बोलता तो करण कभी विद्या न सीख पाता ।

Open Link :जब भगवान परशुराम ने ब्रह्मा नदी को दिया ये श्राप

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