Thursday , December 14 2017
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मकर संक्रांति पौराणिक महत्व और राशिओं में प्रभाव

मकर संक्रांति पौराणिक महत्व

पुरानों के अनुसार इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनि के घर आते हैं जो मकर राशि के घर धनु का स्वामी है।
पिता और पुत्र दोनों में कभी नहीं बनती परन्तु फिर भी मतभेदों के बावजूद पिता सूर्य पुत्र शनि के घर जाते हैं और वहां एक महीना रहते हैं। शास्‍त्रानुसार, मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं और मकर राशि के स्वामी शनि देव हैं, जो सूर्य देव के पुत्र होते हुए भी सूर्य से शत्रु भाव रखते हैं।

सूर्य- शनि का यह मिलाप “मकर संक्रान्ति के रुप में मनाया जाता है.
अतः शनिदेव के घर में सूर्य की उपस्थिति के दौरान शनि उन्हें कष्ट न दें, इसलिए तिल का दान और सेवन मकर संक्रांति में किया जाता है।
राशी के हिसाब से सूर्य का दूसरी राशिओं पर परकोप अगले पेज में …. Next Page