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पंडित दीनदयाल उपाध्याय

पंडित दीनदयाल उपाध्याय की हत्या आज भी है रहस्य, हत्या से पूर्व मिल रही थी धमकियां

पंडित दीनदयाल उपाध्याय की हत्या आज भी है रहस्य, हत्या से पूर्व मिल रही थी धमकियां

जनसंघ के संस्थापक स्वर्गीय पंडित दीनदयाल उपाध्याय को उनकी हत्या से पूर्व लगातार धमकियां मिल रही थी। दीनदयाल जी ने इसकी जानकारी अपने परिजनों को भी दी थी और उनसे कहा था मेरी कभी भी हत्या हो सकती है। इस बात का दावा दीनदयाल जी की भतीजी मधु शर्मा ने एक साक्षात्कार में किया था।

मधु शर्मा ने दावा किया था कि दीनदयाल जी कोई ऐसा राज जरूर जानते थे जो कि पूरे देश की राजनीति को हिला कर रख देती, उनकी मृत्यु के बाद मेरे पिता और अन्य रिश्तेदारों के साथ साथ अटल जी को भी अलग अलग माध्यम से लगातार धमकियां दी जा रही थीं।

उल्लेखनीय है कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय की मृत्यु 10 फरवरी 1968 को मुगलसराय स्टेशन के आस-पास उस वक्त हुई थी जब वो सियालदह एक्सप्रेस ट्रेन से लखनऊ से पटना जा रहे थे।

तो क्या राम अवध और भारत लाल ने की थी पंडित दीनदयाल उपाध्याय की हत्या

दीनदयाल जी की मृत्यु को लेकर केन्द्रीय जांच ब्यूरो ने एक स्पेशल टीम बनाई थी जिसने पांच दिन बाद ही उनकी हत्या को लेकर कोई महत्वपूर्ण सुराग हासिल करने का दावा किया था।

सीबीआई ने उस दौरान अपनी जांच रिपोर्ट में कहा है कि हमने घटना के दो सप्ताह बाद राम अवध और भारत लाल नाम के दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया था, इन दोनों व्यक्तियों ने स्वीकार किया था कि उन्हें पंडित जी ने अपना बैग चोरी करते वक्त देख लिया था और पुलिस के सुपुर्द करने की धमकी दी थी।

इसलिए हमने उन्हें ट्रेन से नीचे धकेल दिया। सीबीआई की विशेष अदालत ने इस मामले में भारत लाल को चोरी का दोषी पाया, उसे चार साल की सजा भी मिली, लेकिन दोनों व्यक्ति हत्या के आरोप से बरी हो गए। बनारस में सेशन कोर्ट ने सीबीआई की उस थ्योरी को मानने से इनकार कर दिया जिसमे चोरों द्वारा हत्या की बात कही गई थी।

11 फरवरी का वो मनहूस और करेंसी नोट का अनसुलझा राज

यह सुबह के 3.45 का वक्त था जब मुगलसराय स्टेशन पर मौजूद लीवरमैन ने दौड़कर सहायक स्टेशन मास्टर को सूचना दी कि रेलवे लाइन के दक्षिण में लगभग 150 यार्ड की दूरी पर इलेक्ट्रिक पोल संख्या 1276 के पास एक शव पड़ा हुआ है, स्टेशन मास्टर ने पुलिस को तत्काल एक मेमो लिख कर भेजा जिस पर लिखा हुआ था लगभग मृत्यु।

डाक्टरों ने शव का परिक्षण कर उन्हें मृत घोषित कर दिया। सुबह जब शव को स्टेशन पर लाया गया, तो भीड़ में से किसी ने उन्हें पहचान लिया वो चिल्लाया यह तो दीनदयाल जी हैं।

आश्चर्यजनक तौर पर उनके हाथ में एक करेंसी नोट मिला, जो संभवतः इसलिए उनके हाथ में रख दिया गया था, जिससे यह लगे कि यह मृत्यु ट्रेन से अचानक गिरने की वजह से हुई है न कि इसके पीछे कोई साजिश है।

जस्टिस चंद्रचूड की रिपोर्ट और अनसुलझे सवाल

केंद्र सरकार ने अलग-अलग राजनैतिक दलों के सांसदों की मांग पर जस्टिस वाईवी चंद्रचूड की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी भी बनाई थी। अपनी जांच रिपोर्ट में जस्टिस चंद्रचूड ने दीनदयाल जी की मृत्यु में किसी भी प्रकार के राजनैतिक साजिश की बात से साफ़ इनकार किया था।

हांलाकि जस्टिस चंद्रचूड की रिपोर्ट पर भी बार-बार सवाल खड़े होते हैं। रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि दीनदयाल जी बोगी में दरवाजे के पास खड़े क्या कर रहे थे, उन्होंने पांच रूपए का नोट हाथ में क्यूँ ले रखा था, अगर चोरों ने ऐसा किया तो उनके हाथ में लगी घडी और उनका बैग चोर क्यूँ नहीं ले गए।

मृत्यु के समय को लेकर भी सीआईडी और सीबीआई की जांच में अंतर था। जस्टिस चंद्रचूड ने खुद भी स्वीकार किया है कि जिस स्थिति में दीनदयाल जी का शव था उस स्थिति में यह संभव नहीं है कि इलेक्ट्रिक पोल से टकराकर उनकी मृत्यु हो गई हो।

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