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कुतुबमीनार एक हिन्दू मंदिर |
कुतुबमीनार एक हिन्दू मंदिर |

कुतुबमीनार एक हिन्दू मंदिर

हम सभी को इतिहास की पुस्तकों में बताया गया की दिल्ली का कुतुबमीनार इस्लामिक हमलावर या कहें इस्लामिक लुटेरे जिसका नाम कुतुब्दीन ऐबक था , उसने बनवाया था | इसके पीछे का कारण था की सनातन धर्म की महान संस्कृति को खत्म किया जाये और हिन्दुओं को नीचा दिखाया जाये | वास्तव में इतिहासकारों ने बिना किसी तथ्य के कह दिया की कुतुबमीनार , कुतुब्दीन एबक ने बनवाया था | वास्तव में यह एक नक्षत्र निरिक्षण केंद्र है जिसका नाम ध्रुव स्तम्भ है |

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लेकिन हिन्दुओं के तुष्टिकरन के लिए ये सच हमसें छुपाया गया | वास्तव में कुतुब्दीन मुस्लिम लुटेरा था जो गोरी के साथ भारत में लुट मचाने और इस्लाम का प्रचार करने आया और लुटेरे गोरी ने जिहाद चलाने की जिम्मेदारी कुतुब्दीन को दे दी | लेकिन जब कुतुब्दीन जिहाद चलाने दिल्ली आया तो इस ध्रुव स्तम्ब को देख कर चोंक गया | पूछने पर उसके चमचों ने बताया जनाब ये क़ुतुबमीनार है | कुतुब्दीन ने कुतुबमीनार तो नहीं बनाया लेकिन उसने इस ध्रुव स्तम्ब के चारों तरफ बने लगभग 27 मन्दिरों को तोड़ डाला | लेकिन नकली इतिहासकरों ने इस ध्रुव स्तम्भ को कुतुबमीनार बना दिया | गौर करने वाली बात यह थी की कुतुब्धीन 1206 से लेकर 1210 तक ही भारत में रहा और इतने कम समय में उसने कैसे इतनी बड़ी इमारत बना डाली | और तो और उसने अपने 4 सालों में पहले 2 साल लाहौर में बिताये |

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कुछ लोगों का कहना है की उसने ये मीनार नमाज़ के समय अजान देने के लिए बनाई थी | लेकिन क्या इतनी बड़ी इमारत से लोगों को अजान सुनाई दे सकती थी ? | तो इन सभी बातों से पता चलता है की ये मीनार वास्तव में कुतुब्दीन ने नहीं बनाई थी | सच्चाई ये है की इसके परिसर में एक महरोली है जिसे वरामिहिर के नाम से बनाया गया था जो की सम्राट चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य के नवरत्नों में से एक थे और वे महान ख्गोल्शात्री थे | उन्होंने स्तम्भ के चारो तरफ 27 परिपथों का निर्माण करवाया था | और इन परिपथों के स्तम्भों पर देवी देवताओं की कलाकृतियां बनाई गई थी | और सबसे बढ़ा प्रमाण यह है , इसी परिसर में बना हुआ लोह स्तम्भ , जिसमे ब्रम्ही भाषा में लिखा गया है की ये स्तम्भ सम्राट चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ने बनवाया है | लेकिन हैरान करने वाली बात है की इस लोह स्तम्भ में आज तक जंग नहीं लगा |