Thursday , September 20 2018
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इन चार जजों की असलियत |

इन चार जजों की असलियत |

मने देखा की कल सुप्रीम कोर्ट के 4 जज मीडिया के सामने आकर लोकतंत्र का हवाला दे रहे थे | लेकिन सत्य कुछ और है | सच जानने से पहले जानते है इन जजों के बारे में : पहले आपको बताते है इनमे से एक जज जोसफकुरियन के बारे में!ये जज मानसिकता से एक ईसाई कट्टरपंथी है, प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को एक कार्यक्रम रखा था तो इसने ऐतराज़ जताया की इसे तो रविवार को चर्च जाना है, मोदी को ईसाई विरोधी साबित करने की कोशिश की, मसलन जज साहेब के लिए काम नहीं बल्कि ईसाइयत यानि मजहब पहले है| अब आते है जस्टिस चमलेश्वर पर, ये वो जज है जो कांग्रेस के काफी करीबी माने जाते है और हाल ही में इन्होने आधार का भी विरोध किया था, आपको बता दिए की आधार से भ्रष्टाचारियों की नींद उडी हुई है चूँकि उस से सबकुछ कनेक्ट किया जा रहा है, कई तरह के फर्जीवाड़े आधार से बंद हो चुके है| अब एक जज है जस्टिस गोगोई – ये असम के है और असम के पूर्व मुख्यमंत्री केशबचंद्र गोगोई का पुत्र है, केशब चंद्र गोगोई कांग्रेस के मुख्यमंत्री हुआ करते थे, और ये जज साहेब कोंग्रेसी मुख्यमंत्री के पुत्र है| इन लोगों के साथ घूम रहा है शेखर गुप्ता जैसा अफ़ज़लप्रेमी, अवार्डवापसी गैंग का कुख्यात पत्रकार, और ये लोग कह रहे है की देश का लोकतंत्र खतरे में है| देखने  की बात है सुप्रीम कोर्ट हिन्दू त्योहारों पर भी पाबंदी लगता है और फिर भी कहता है की भारत का लोकतंत्र खतरे में है |वास्तव में इसके पीछे एक गहरी साजिश है और इसे जानने के लिए  हमें सबसे पहले इन घटनाओं को समझना होगा : सबसे पहले सरकार को यह हवाला दे कर अवार्ड वापिस किये जातें है की देश में जातिवाद और धार्मिक हिंसा बड़ी है और फिर अय्यर पाकिस्तान में मोदी सरकार को हटाने की बात करते है और फिर कश्मीर में अलगाववादियों से मिलने जातें है और भारत की सेना का मजाक उडातें है | यहीं नही हरियाणा में जात आन्दोलन को हिंसक बनाने में भी कांग्रेस का हाथ रहता है और तो और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल  गाँधी चीन से जाकर मिलता है , उसके बाद कांग्रेस के सभी नेता पाकिस्तान के लोगों से भारत में बात करतें है | यहीं नहीं राहुल गाँधी बहरीन जाकर भारत के खिलाफ बातें करतें है और पुणे में जातिवाद हिंसा भडकाने में जिग्नेश मेवानी जैसे लोगों का साथ देतें है | अब इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के जज मीडिया के सामने आतें हैं |

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ये चरों जज चीफ जस्टिस दीपक मिश्र के खिलाफ जातें है और कहतें है की उन्हें अपनी मन मर्जी के केस नहीं दिए जा रहे नही जो की भारत की न्याय प्रक्रिया के खिलाफ है | अब आइये जानतें है दीपक मिश्रा के बारे में : याकूब मेनन को फाँसी इन्ही ने सुनाई थी।

2- सिनेमा में राष्ट्रगान इन्हीं ने बजवाया था ।

3- निर्भया गैंग रेप में तीनोँ आरोपियों को फाँसी इन्हीं ने सुनाई थी !

4- ऑनलाइन एफआईआर दिल्ली पुलिस से इन्होंने ही करवाई थी ।

5- अयोध्या राम मंदिर मामले में भी यही सुनवाई कर रहे हैं।

6- केरल के सबरीमाला मंदिर के द्वार महिला श्रद्धालुओं के लिए खोलने के आदेश भी जस्टिस मिश्र ने ही दिए थे।

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सोचने वाली बात है की आगर इसके पहले न्याय व्यवस्था ठीक थी तो सलमान खान बरी कैसे हो गया ? जब आंतकवादियों के लिए रात को सुनवाई होती थी तब न्याय व्यवस्था ठीक थी ? भोपाल गैस कांड के आरोपियों को सजा कुई नहीं मिली ? और 2 घोटाले में भी सभी दोषी बरी कैसे हो गये ? अब बात यह भी है की फरवरी में श्री राम मन्दिर की सुनवाई भी शुरू होनी है और आने वाले साल 2019 में चुनाव भी हैं | कांग्रेस हर हाल में सत्ता चाहती है ये इस सब घटनाओं का सबूत है |