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Reality Of Valentine Day
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वैलेंटाइन डे की पूरी सच्चाई

वैलेंटाइन डे की पूरी सच्चाई

आज पूरे देश में वैलेंटाइन डे मनाया जायगा और भारतीय संस्कृति की धज्जिया उड़ाई जायगी लेकिन क्या आप जानते है वास्तव में वैलेंटाइन डे क्यों मनाया जाता है ? आइये जानते है वैलेंटाइन डे की पूरी सच्चाई ।
यूरोप और अमेरिका में आपको शायद ही ऐसा कोई पुरुष या मिहला मिले जिसकी एक शादी हुई हो, जिनका एक पुरुष से या एक स्त्री से सम्बन्ध रहा हो और ये एक दो नहीं हजारों साल की परम्परा उनके यहाँ है और ये लोग “Live in Relationship” में रहना अच्छा समझते हैं । इसका मतलब होता है “बिना शादी के पती-पत्नी की तरह से एक साथ रहना”। और यही परंपरा यूरोप और अमेरिका जैसे देशों आज भी चलती है ।

प्लेटो जो की एक एक यूरोपीय दार्शनिक है उसका भी एक स्त्री से सम्बन्ध नहीं रहा है ।प्लूटो ने लिखा है कि “मेरा 20-22 स्त्रीयों से सम्बन्ध रहा है” अरस्तु भी यही कहता है, देकार्ते भी यही कहता है, और रूसो ने तो अपनी आत्मकथा में लिखा है कि “एक स्त्री के साथ रहना, ये तो कभी संभव ही नहीं हो सकता । इन सभी महान दार्शनिकों का तो कहना है कि स्त्री में तो आत्मा ही नहीं होती और स्त्री तो मेज और कुर्सी के समान हैं, जब पुराने से मन भर गया तो पुराना हटा के नया ले आये ।

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तो बीच-बीच में यूरोप में कुछ-कुछ ऐसे लोग निकले जिन्होंने इन बातों का विरोध किया और इन रहन-सहन की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किये । उनमें से एक व्यक्ति थे जो आज से लगभग 1500 साल पहले पैदा हुए, उनका नाम था – वैलेंटाइन

ये कहानी है 478 AD (after death) की, यानि ईशा की मृत्यु के बाद. Next Page

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