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जाने क्यों संस्कृत को विश्व की महान भाषा माना जाता है |
जाने क्यों संस्कृत को विश्व की महान भाषा माना जाता है |

जाने क्यों संस्कृत को विश्व की महान भाषा माना जाता है |

भारत ने दुनिया को ऐसे महान से महान आविष्कार दिए है जिन्होंने पूरी दुनिया को बदल दिया | लेकिन भाषा भारत की एसी महान देन है जिसने पुरे विश्व को बोलना और लिखना सिखाया है | हमें जानकर गर्व होगा की दुनिया की सबसे पहली भाषा संस्कृत भारत ने दी थी | यहीं नहीं लिपि का आविष्कार भी भारत में ही हुआ और पूरी दुनिया को भारत ने लिखना सिखाया | और तो और सबसे चीन जैसे देशों ने लिखना हमसे सीखा |

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  • संस्कृत दुनिया की लगभग 97 % मूल भाषाओं की जननी है | जर्मन और फ्रेंच भाषा के शब्द रूप और धातु रूप एक समान ही है | रुस्सियन , जर्मन , फ्रेंच ,जैसी अनेकों भाषाए संस्कृत से ही ली गई है और जर्मन के लोग तो अपने आप को बड़े गर्व से आर्य कहतें है | यहीं नहीं जर्मन की एयर लाइन्स का नाम लुप्तहंस रखा गया है जो की संस्कृत से लिए गया है | जर्मन में संस्कृत साहित्य के लिए अनेक विश्वविद्यालय बने हुयें है |
  • कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के लिए सबसे सरल भाषा संस्कृत है | क्योंकि सबसे अच्छी एल्गोर्दीन में ही त्यार की जा सकती है | इसका सारा श्रय महर्षि पाणिनि को जाता है क्योंकी महर्षि पाणिनि ने इस भाषा का व्याकरण बहुत ही अच्छे से त्यार किया था | नासा के बनाये जा रहे सुपर कंप्यूटर संस्कृत भाषा पर ही आधारित है |

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  • संस्कृत के पास दुनिया का सबसे बड़ा शब्द कोष है |इसमें  लगभग 102 अरब 78 करोर 50 लाख शब्द अब तक हो चुकें है | और ये तो अब तक इस्तेमाल हुए शब्दों की गिनती है आने वाले समय में इसमें और भी शब्द जोड़े जा सकते है |
  • संस्कृत से सबसे कम शब्दों में हम अपनी बात रख सकते है | इसे बोलने से दिमाग तेज़ होता है और याद करने की शमता बढती है और तो और बोलने से शरीर का ब्लड प्रेशर ठीक रहता है |

ये बड़े गर्व की बात है की लन्दन और दुनिया के देशो में आज इसे जरूरी विषय के तोर में पढ़ाया जा रहा है |