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Swami Vivekananda
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स्वामी विवेकानन्द सप्त ऋषिओं में से एक के अवतार

ऋषि का विवेकानन्द के रूप में अवतार :   एक  बार श्री राम कृष्णपरमहंस को सात महान ऋषिओं का आभास हुआ जो की अपने ध्यान में पूरी तरह लीन थे | उसी समय एक ईश्वरीय बालक जिसका नाम उस वातावरण के फलस्वरूप हुआ ,धीरे धीरे उनकी तरफ बदने लगा | उस बालक ने अपनी कोमल बुजाओं से एक ऋषि की गर्दन को स्पर्श करते हुए उसनके कानो में मदुर स्वर में कहा मैं जा रहा हूँ आपको भी मेरे साथ आना पड़ेगा | उस ऋषि ने मोन रहते हुए बालक की इस बात को स्वीकार कर लिया | श्री रामकृष्ण परमहंस जी ने कुछ समय बाद सबिकार किया की उस ऋषि ने नरेंद्र के रूप में जन्म लिया जो आज स्वामी विवेकानन्द के नाम से जाने जाते हैं |

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विवेकानन्द भगवान शिव का आशीर्वाद : विवेकानन्द के पिता विश्वनाथ दत्त और     माता भुवनेश्वरी देवी की पुत्र प्राप्ति की इच्छा थी औरलिए वे शिव की पूजा करती थी | उन्होंने अपनी एक अम्सी से वाराणसी में बिरेस्व्र शिव मन्दिर में  प्रार्थना करने के लिए     कहा औरकी माता स्वयं भी शिव की पूजा करती रही | एक वर्ष बाद   ही उनके घर में स्वामी विवेकानन्द का जन्म हुआ |

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श्री राम कृष्णपरमहंस से भेंट : एक दिन कालेज में विवेकानन्द के प्रोफेसर विलियम हस्ती की कक्षा में एक प्रसिध अंग्रेज कवि की कविता के बारे में बताया जा रहा था जिसमें परमानन्द की उच्चतम स्थिति के बारे में बताया गया था | प्रोफेसर ने कहा की एक स्थिति सिर्फ श्री रामकृष्ण परमहंस को ही प्राप्त है | कुछ दिनों बाद नरेंद्र ने श्री राम कृष्ण जी से मिलने के लिए दक्षिणेश्वर में जाने का फैंसला किया और वहां उनका श्री रामकृष्ण जी ने बहुत अच्छा स्वागत किया | स्वामी विवेकानन्दजी ने उनसे पूछा   की क्या अपने इश्वर को देखा है ? और   उनको उत्तर मिला हाँ मैंने देखा है | इस प्रकार वे उनके गुरु बने |

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 जग्गनमाता माँ काली से भेंट : नरेंद्र ने जब दक्षिणेश्वर में जाना शुरू किया तो उनके पिता का देहांत हो गया और उनके परिवार पर पहाड़ टूट पड़ा | नरेंद्र ने रामकृष्ण जी से माँ काली   से उनके लिए प्रार्थना करने को कहा | लेकिन राम कृष्ण जी ने कहा की वे स्वयं ही मन्दिर जाकर उनसे प्रार्थना करें | जब नरेंद्र मन्दिर   के अंदर गये तो   वे सब    भूल गये और उनसे संसारिक मांग की बजाये ज्ञान और भक्ति की मांग कर बेठे | और उनको   भक्ति   और ज्ञान का वरदान मिल गया | साथ ही   श्री राम कृष्णपरमहंस जी ने उन्हें आशीर्वाद दिया की उनके परिवार की जीवन की मूलबहुत जरूरतें पूरी होती रहेंगी |

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