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जब श्री रामभक्त हनुमान जी ने तोड़ा था भीम का घमंड |
जब श्री रामभक्त हनुमान जी ने तोड़ा था भीम का घमंड |

जब श्री रामभक्त हनुमान जी ने तोड़ा था भीम का घमंड |

जब पांडव अपना सब कुछ हार गये तो वे अपने शाही वस्त्र त्यागकर भगवे कपड़े पहनकर वनों में रहने लगे | एक दिन एक कमल का फूल हवा के कारण माता द्रोपदी के पास आ गया और उन्होंने भीम से इस कमल को ले आने  के लिए कहा | वे फूल की खोज करने लगे | जब वे आगे जा रहे थे तो एक वानर उस रस्ते में लेटा हुआ था | अपनी  शक्ति के घमंड में चूर भीम ने उसे रास्ता छोड़ने के लिए कहा लेकिन वानर ने जवाब दिया की वह बहुत ही  कमजोर और बुडा  है इसलिए आप खुद मुझे उठाकर हटा दे | भीम को अपनी शक्ति पर बहुत ही घमंड था और वो उस वानर को एक आम बन्दर समझकर हटाने का प्रयास करने लगा लेकिन लाख कोशिशों के बाद भी भीम अपनी शक्ति से उस वानर को न हटा सका |

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जब  उसे ज्ञात हुआ की ये कोई आम वानर नहीं है तो उसने उस वानर से अपना असली रूप जानने की इच्छा प्रगट की | तब वानर ने कहा की तुम मेरे छोटे भाई हो और मैं श्री राम भक्त हनुमान हूँ | ये सुनकर वे बहुत ही लज्जित हुए और उन्होंने ने हनुमान जी के चरण स्पर्श किये और क्षमा मांगने लगे | हनुमान जी ने भीम को उठाया और उसके यहाँ आने का कारण पूछा तो भीम ने कहा की वः अपनी पत्नी के लिए विशेष कमल के फूलों की खोज कर रहा है | ये सुनकर हनुमान जी ने भीम को हवा के सहारे उस पर्वत ले गये जहाँ ये फूल खिलते थे | यहीं  हनुमान जी ने उन्हें अपने विराट रूप क दर्शन भी दिए थे |

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