Monday , November 20 2017
Home / Trending Now / कौन हैं भगवान अरावन ? जिनके होती है हिजड़ों के साथ शादी ?
कौन हैं भगवान अरावन ? जिनके होती है हिजड़ों के साथ शादी ?
कौन हैं भगवान अरावन ? जिनके होती है हिजड़ों के साथ शादी ?

कौन हैं भगवान अरावन ? जिनके होती है हिजड़ों के साथ शादी ?

कौन हैं भगवान अरावन ? जिनके  होती है हिजड़ों के साथ शादी ?

Gurugram :  भारत के तमिलनाडु राज्य में  देवता अरावन की पूजा की जाती है। कई जगह इन्हे इरावन के नाम से भी जाना जाता है। अरावन हिंजड़ो के देवता है इसलिए दक्षिण भारत में हिंजड़ो को अरावनी कहा जाता है। हिंजड़ो और अरावन देवता के सम्बन्ध में सबसे अचरज वाली बात यह है की हिंजड़े अपने आराध्य देव अरावन से साल में एक बार विवाह करते है।
हालांकि यह विवाह मात्र एक दिन के लिए होता है। अगले दिन अरावन देवता की मौत के साथ ही उनका वैवाहिक जीवन खत्म हो जाता है। अब सवाल यह उठता है की अरावन है कौन , हिंजड़े उनसे क्यों शादी रचाते है और यह शादी मात्र एक दिन के लिए ही क्यों होती है ?  इन सभी प्रशनो का उत्तर जानने के लिए हमे महाभारत काल में जाना पड़ेगा।

अरावन अर्जुन और नाग कन्या उलुपी के पुत्र थे | महाभारत की कथा के अनुसार एक बार अर्जुन को द्रोपदी से शादी की एक शर्त के उल्लंघन के कारण इंद्रप्रस्थ से निष्कासित करके एक साल की तीर्थयात्रा पर भेजा गया था । वहाँ से निकलने के बाद अर्जुन उत्तर पूर्व भारत में जाते है जहाँ की उनकी मुलाक़ात एक विधवा नाग राजकुमारी उलूपी से होती है। दोनों को एक दूसरे से प्यार हो जाता है और दोनों विवाह कर लेते है।

विवाह के कुछ समय पश्चात उलूपी एक पुत्र को जन्म देती है जिसका नाम अरावन रखा जाता है। पुत्र जन्म के पश्चात अर्जुन उन दोनों को वही छोड़कर अपनी आगे की यात्रा पर निकल जाता है। अरावन नागलोक में अपनी माँ के साथ ही रहता है।
युवा होने पर वो नागलोक छोड़कर अपने पिता के पास आता है। तब कुरुक्षेत्र में महाभारत का युद्ध चल रहा होता है इसलिए अर्जुन उसे युद्ध करने के लिए रणभूमि में भेज देता है।महाभारत युद्ध में एक समय ऐसा आता है जब पांडवो को अपनी जीत के लिए माँ काली के चरणो में  नर बलि हेतु एक राजकुमार की जरुरत पड़ती है। जब कोई भी राजकुमार आगे नहीं आता है तो अरावन खुद को नर बलि हेतु प्रस्तुत करता है लेकिन वो शर्त रखता है की वो अविवाहित नहीं मरेगा।
इस शर्त के कारण बड़ा संकट उत्त्पन हो जाता है क्योकि कोई भी राजा  यह जानते हुए की अगले दिन उसकी बेटी विधवा हो जायेगी | अरावन से अपनी बेटी की शादी के लिए तैयार नहीं होता है। जब कोई रास्ता नहीं बचता है तो भगवान श्री कृष्ण स्वंय को मोहिनी रूप में बदलकर अरावन से शादी कर लेतें है और अगले ही दिन अरावन स्वयं अपनी बली दे देता है | अरावन की मृतु के बाद श्री कृष्ण मोहिनी रूप में विलाप करतें है | इसलिए हिजड़े एक रात के लिए अरावन से शादी रचाते है |