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क्यूँ होती है स्वर्ण मंदिर कि दिवाली दुनिया में सबसे बेहतरीन
क्यूँ होती है स्वर्ण मंदिर कि दिवाली दुनिया में सबसे बेहतरीन

क्यूँ होती है स्वर्ण मंदिर कि दिवाली दुनिया में सबसे बेहतरीन

सिखों के लिए दीवाली का त्योहार मनाने के अपने स्वयं के महत्व है। जहाँगीर ने कही हिन्दू गुरुओं को बंधी बना के रखा था | दीपवाली में जहाँगीर ने अनेको हिन्दू गुरुओं को  मुक्त किया था उन में से एक थे आठवे गुरु हर गोबिंद सिंह जी |  गुरुओं  की जेल से घर वापसी के उपलक्ष्य में यह जश्न मनाते है।

जेल से मुक्त होने के बाद हर गोबिंद जी पंजाब के शहर अमृतसर में  स्वर्ण मंदिर गये। लोगों ने बहुत उत्साह और साहस के साथ पूरे शहर को सजाकर और दीयें जलाकर अपने गुरु की आजादी का जश्न मनाया। उस दिन से गुरु हरगोबिंद जी बंदी-छोर अर्थात् मुक्तिदाता के रूप में जाने जाना शुरू हो गये। लोग गुरुद्वारे जाते है और भगवान से पूजा करते है और लंगर करते है। वे अपने गुरु की मुक्ति दिवस के रूप में दीवाली मनाते हैं यही कारण है कि यह बंन्दी दिवस के रूप में भी जाना जाता है।

आज भी  स्वर्ण मंदिर को दीपावली पर  बहुत सजाया जाता है , एसी आतिशबाजी होती है कि दुनिया देखती है | अमृतसर कि दिवाली दुनिया में सबसे जादा भव्य दिवाली होती है |

सिखों के दीवाली मनाने का एक और महत्व

साल 1737 में भाई मणि सिंह जी की शहादत है, जो बड़े सिख विद्वान और रणनीतिकार थे। दीपावली के दिन पर उन्होंने खालसा के आध्यात्मिक बैठक में कर का भुगतान करने से इनकार कर दिया जो मुगल सम्राट द्वारा उन लोगों के ऊपर लगाया गया था, जो मुसलमान नहीं थे। यही कारण है कि वे भी भाई मणि सिंह जी की शहादत याद करने बंदी छोर दिवस के रूप में दीवाली मनाते है।

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