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क्यों जलाया गया नालन्दा विश्वविद्यालय ?
क्यों जलाया गया नालन्दा विश्वविद्यालय ?

क्यों जलाया गया नालन्दा विश्वविद्यालय ?

गुरुग्राम : बख्तियार खिलजी ने 1199 को विश्व प्रसिद्ध नालन्दा विश्वविद्यालय को जला कर पूर्णतः नष्ट कर दिया | उसके पीछे का कारण उसका सनकीपन और गुस्सा था । एक बार वह बहुत बीमार पड़ा और उसके हकीमों ने उसको ठीक करने की पूरी कोशिश की लेकिन वह ठीक नहीं हो सका ।

फिर उसे किसी ने सलाह दी की नालन्दा विश्वविद्यालय के आयुर्वेद विभाग के प्रमुख आचार्य राहुल श्रीभद्रजी को बुलाया जाये  और उनसे आयुर्वेद अनुसार इलाज कराया जाये । लेकिन उसे यह पसंद नहीं था कि कोई भारतीय वैद्य उसके हकीमों से उत्तम ज्ञान रखते हो और वह किसी काफ़िर से उसका इलाज करवाए लेकिन फिर भी उसे अपनी जान बचाने के लिए उनको बुलाना पड़ा ।उसने आचार्य राहुल श्रीभद्र जी को बुलाया और उनके सामने शर्त रखी की मैं तुम्हारी दी हुई कोई दवा नहीं खाऊंगा और किसी भी तरह मुझे ठीक करों वर्ना मरने के लिए तैयार रहो।

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ये सुन कर वैद्यराज जी बहुत चिंता में पड़ गए और बहुत सोचने के बाद अगले दिन वह उस सनकी के पास कुरान लेकर चले गए और कहा इस कुरान की पृष्ठ संख्या इतने से इतने तक पढ़ लीजिये आप ठीक हो जायेंगे ,उसने पढ़ा और ठीक हो गया । लेकिन इसके पीछे आचर्य जी का तेज़ दिमाग था उनको पता था की  हिन्दू किसी भी धर्म ग्रन्थ को जमीन पर रख के नहीं पढ़ते और न ही थूक लगा कर उसके पृष्ठ पलटते हैं लेकिन मुस्लिम ठीक उलटा करते हैं वे कुरान के हर पेज को थूक लगा लगा के पलटते हैं।

बस वैद्यराज राहुल श्रीभद्र जी ने कुरान के कुछ पृष्ठों के कोने पर एक दवा का  लेप लगा दिया था। वह थूक के साथ मात्र दस बीस पेज चाट गया और ठीक हो गया और उसने इस एहसान का बदला नालंदा को नेस्तनाबूत करके दिया। उसको बड़ी झुंझलाहटहुई की आचार्य जी ने उसकी शर्त के अनुसार बिना किसी दवा के उसे ठीक कर दिया था । आचार्य जी का धन्यवाद करने के बजाय उसे इस बात पर बहुत गुस्सा आया की जो काम उसके हकीम न कर सके वो भारतीय वैद्य ने कर दिया था।

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आयुर्वेद धन्यवाद करने की बजाय गुस्से में उसने नालंदा विश्वविद्यालय में ही आग लगवा दिया वो भी सिर्फ एक छोटी सी बात पर । और तो और वहां इतनी पुस्तकें थीं कि करीब 3 महीने तक आग जलती रही और सारी पुस्तकें जल कर राख हो गई थी। यहीं नही उसने अनेक धर्माचार्य मार डाले थे ।